पीएससी कॉपी जांच विवाद गहराया: गोपनीयता पर सवाल, सीबीआई जांच की मांग
डिप्टी कलेक्टर की कॉपियां अब डाइट और एससीआरटी के शिक्षकों से भी जंचवाई गईं
भास्कर दूत
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) की डिप्टी कलेक्टर-डीएसपी भर्ती परीक्षा की कॉपियां स्कूल 'गुरुजी' से जंचवाने का मामला अब और गंभीर हो गया है। पहली रिपोर्ट में यह सामने आया था कि बिलासपुर के पीजीबीटी कॉलेज और रायपुर के एलबी संवर्ग के व्याख्याताओं को कॉपी जांचने बुलाया गया है।
अब फॉलोअप में चौंकाने वाली जानकारी मिली है कि डाइट और एससीआरटी जैसे पूरी तरह से स्कूली शिक्षा से जुड़े संस्थानों के शिक्षकों को भी इस काम में लगाया गया है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज ने परीक्षा की गोपनीयता पर सवाल उठाते हुए इस पूरे मामले की सीबीआई जांच की मांग की है।
असल में क्या हुआ?
पीजीबीटी कॉलेज बिलासपुर से प्रभारी प्रिंसिपल नीता मुखर्जी और दो व्याख्याताओं को कॉपी जांच के लिए बुलाया गया।
ये सभी मूल रूप से स्कूल शिक्षा विभाग के एलबी संवर्ग से आते हैं।
रायपुर से भी ऐसे ही व्याख्याताओं को कापियां जांचने बुलवाया गया।
अब जानकारी मिली है कि डाइट (DL.Ed कराने वाला संस्थान) और एससीआरटी (जो माध्यमिक शिक्षा मंडल की परीक्षाओं की मॉनिटरिंग करता है) से भी शिक्षकों को शामिल किया गया।
विशेषज्ञों का कहना है कि इतने उच्च स्तर की भर्ती परीक्षा में इन संस्थानों की भागीदारी गोपनीयता और परीक्षा की गुणवत्ता दोनों पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
कांग्रेस का आरोप: गोपनीयता भंग
इस नए खुलासे पर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज ने सरकार और आयोग दोनों पर निशाना साधा।
उन्होंने कहा - “पीएससी परीक्षा को यूपीएससी की तर्ज पर कराने का वादा भाजपा ने किया था। लेकिन अब गोपनीयता पूरी तरह भंग हो चुकी है। कॉपियां स्कूल गुरुजियों से जंचवाना मजाक से कम नहीं है। बिलासपुर पीजीबीटी कॉलेज के प्रभारी प्रिंसिपल और व्याख्याताओं के नाम तक सार्वजनिक हो चुके हैं।”
बैज ने इस पूरे मामले की CBI जांच की मांग कर दी है।
परीक्षा नियंत्रक की चुप्पी जारी
मामले पर छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग की परीक्षा नियंत्रक लीन कोसम से संपर्क करने की कोशिश की गई।
'भास्कर दूत' ने उन्हें व्हाट्सऐप कॉल और मोबाइल नंबर 0000007876 पर बार-बार संपर्क किया, लेकिन उन्होंने न तो फोन रिसीव किया और न ही कोई स्पष्टीकरण देना जरूरी समझा।
मामला अब कहाँ जा रहा है?
पीएससी की यह भर्ती परीक्षा राज्य में सबसे बड़ी प्रतियोगी परीक्षा मानी जाती है। लाखों अभ्यर्थियों का भविष्य इससे जुड़ा है। लेकिन कॉपियों की जांच की प्रक्रिया को लेकर उठ रहे सवाल अब सियासी तूल पकड़ चुके हैं।
गोपनीयता भंग होने के आरोपों और सीबीआई जांच की मांग के बाद अब निगाहें सरकार और आयोग की अगली प्रतिक्रिया पर है।

